ग़ज़ल (इक दिन तो इकरार करोगे) दैनिक लेखनी प्रतियोगिता -30-Jul-2024
ग़ज़ल (इक दिन तो इकरार करोगे)
#बह्र : 22 22 22 22
#क़ाफिया - आर
#रदीफ - करोगे
कब तक तुम तकरार करोगे,
इक दिन तो इकरार करोगे।।१।।
माना कठिनाई है दो पल ,
इक दिन तो चमत्कार करोगे।।२।।
अब तो अपनी जिद को छोड़ो ,
कब तक तुम बीमार करोगे।।३।।
समय बहुत ही बीत गया अब,
कब सपने साकार करोगे।।४।।
कब तक चुप बैठे रहना है,
आखिर कब हुंकार करोगे।।५।।
अब तो तुम उसको अपना लो,
कब तक तुम मनुहार करोगे।।६।।
बहुत सताया है अब तक तो,
कब मुझपर उपकार करोगे।।७।।
अब तो अपनापन दिखलाओ,
कब तक तुम तिरस्कार करोगे।।८।।
सीमित सा है तेरा जीवन,
कब तक तुम विस्तार करोगे।।९।।
नफरत से मत देखो मुझको,
कब प्यार कि बौछार करोगे।।१०।।
~~~~राजीव भारती
पटना-बिहार (गृह नगर)